क्षणिका

ज़िन्दगी

जब वक़्त है मेरे पास तो तुम मशरूफ़ हो गए, कभी मैं तुम्हारे इंतज़ार में कभी तुम मेरे इंतज़ार में और ज़िंदगी यूँ ही तमाम हो गयी| MR

इक ऐसा जहान

मुक्त हो जो ऐसा इक जहान दे दे,मैं उन्मुक्त उडू छूने ऊंचाइयां, ऐ खुदा मेरे पंखों को ऐसी उड़ान दे दे। कोई गगन अब छूटने न पाए, कोई दिशा भी खाली न रहे, मैं बहुं अब चारों और, ऐ खुदा मुझे उन हवाओं सा बहाव दे दे। मुझे मैं से करके जुदा,मेरे अंदर का दीदार …

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दर्द

ये किस्सा आम नहीं,पर आम लोगो का है, जो दर्द सहता है,अमीरों की इस भीड़ में तन्हा-तन्हा सा रहता है | जिसके सर पर सर्द रातें ढ़लती हैं, घर में पेट खाली और भूख पलती है | जिसे नंगे बदन के बेआबरू होने का ख़ौफ़ नहीं, उसके शिथिल होने की चिंता की चिता जलती है …

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जी ले तू

ज़िन्दगी बहुत हसींन है, सर पे आसमां,पैरों तले ज़मीन| ज़िन्दगी इक ख्वाब है, जी ले इसे खुल कर,ज़िन्दगी कल नहीं आज है| क्यों तू कल के इंतज़ार में, जो है पास खो रहा,पल-पल क्यों है रो रहा ?