इक ऐसा जहान

मुक्त हो जो ऐसा इक जहान दे दे,मैं उन्मुक्त उडू छूने ऊंचाइयां, ऐ खुदा मेरे पंखों को ऐसी उड़ान दे दे। कोई गगन अब छूटने न पाए, कोई दिशा भी खाली न रहे, मैं बहुं अब चारों और, ऐ खुदा मुझे उन हवाओं सा बहाव दे दे। मुझे मैं से करके जुदा,मेरे अंदर का दीदार दे दे, मैं बाँट सकू जहाँ में खुशियाँ, ऐ खुदा मुझे तू इतना प्यार दे दे।
MR